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Thursday, 9 June 2016

पेंटर की 6 साल की बेटी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

 शहर के हड़पसर में 7 साल की एक बच्ची ने अपने इलाज के लिए नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा था। लेटर लिखने के 5 दिन बाद मोदी ने उसे जवाब दिया। इसके बाद पीएमओ से डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को लेटर लिखकर बच्ची की मदद करने को कहा। और अब उसके हार्ट की फ्री सर्जरी की गई। बच्ची के हार्ट में छेद था। उसके पिता पेंटिंग का काम करते हैं। फाइनेंशियल कंडीशन अच्छी नहीं होने के कारण वो उसके ऑपरेशन के लिए पैसे नहीं जुटा पा रहे थे।

दूसरी क्लास की स्टूडेंट वैशाली के पिता मोनीष यादव रुप से अहमदनगर के रहने वाले हैं। वो हड़पसर इलाके में पेंटिंग का काम करते हैं। वैशाली जब छोटी थी तब उसकी मां उसे छोड़ गई। अब वह अपने अपने पिता के साथ रहती है। - दो साल पहले वैशाली स्कूल में अचानक बेहोश होकर गिरी इसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले गए तब डॉक्टर ने बताया था कि उसके दिल में छेद है ऑपरेशन करना जरुरी है।

लोगों ने नहीं दी मदद

वैशाली के पिता और चाचा ने उसके इलाज के लिए कई एनजीओ और राजनीतिक पार्टियों से मदद के लिए गुहार लगाई लेकिन किसी से मदद नहीं मिली। पिता और चाचा की यह सारी मेहनत देख रही वैशाली ने एक दिन टीवी पर मोदी सरकार का 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' विज्ञापन देख पिता से नरेंद्र मोदी से लेटर लिखने को कहा। उसके चाचा ने कहा कि तुम ही अपने शब्दों में अपने हाथों से यह लेटर लिखो।

एेसे हुआ वैशाली का ऑपरेशन

20 मई को वैशाली ने पीएम मोदी को लेटर लिखा। इसके साथ उसने अपनी स्कूल की आईडी और मोबाइल नंबर भी दिया था। 27 मई को पीएमओ ने यह लेटर देख पुणे के कलेक्टर सौरभ राव को इस बच्ची के इलाज को लेकर आदेश दिया। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी वैशाली के घर गए लेकिन उन्हें उसका पता नहीं चला। बाद में उसके स्कूल गए और वहां से उसका पता चला। वैशाली की औंध स्थित जिला सरकारी अस्पताल में जांच कराई गई। इसके बाद उसे 4 जून को रुबी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। मंगलवार 7 जून को उसे डिस्जार्च कर दिया गया।

पीएम मोदी जैसा बनना चाहती है वैशाली

- वैशाली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली मदद पर खुशी जताई है। उसने कहा कि मुझ जैसी एक आम बच्ची के लिए प्रधानमंत्री ने मदद दी इससे मुझे काफी खुशी हुई है। मैं पीएम मोदी जैसा बड़ा बनने की सोच रही हूं जिससे देश की सेवा कर सकूं। Read more  http://www.jagran.com/

Monday, 30 May 2016

27 को होगा भुजबल की जमानत पर फैसला

मुंबई उच्चन्यायालय राकांपा नेता छगन भुजबल की जमानत पर फैसला उच्चस्तरीय स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट देखने के बाद करेगा। भुजबल के स्वास्थ्य से संबंधित यह रिपोर्ट 27 को कोर्ट में पेश की जाएगी।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 मार्च को गिरफ्तार किए गए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उच्चन्यायालय में जमानत की अर्जी लगाई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत में यह अर्जी खारिज होने के बाद वह उच्चन्यायालय के सामने पहुंचे हैं।

भुजबल की अर्जी में कहा गया था कि वह मधुमेह, श्वांस, रक्तचाप एवं हृदय रोगों से पीड़ित हैं। इन रोगों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। अभियोजन पक्ष की वकील पूर्णिमा कंथारिया ने यह कहते हुए उनकी जमानत का विरोध किया कि सरकारी अस्पताल में भुजबल का अच्छा इलाज चल रहा है। अभी जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद जज ने ईडी को निर्देश दिए कि सरकारी डॉक्टरों के उच्चस्तरीय पैनल द्वारा छगन भुजबल की जांचकर यह रिपोर्ट 27 मई को उनके सामने पेश की जानी चाहिए। उसके बाद ही वह भुजबल की जमानत पर कोई फैसला करेंगे। बता दें कि दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन निर्माण घोटाले एवं मुंबई में एक भूखंड के घोटाले एवं इन घोटालों से पैसा कमाकर विदेश भेजने के मामले में ईडी एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भुजबल, उनके भतीजे समीर एवं बेटे पंकज भुजबल पर आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। इसी मामले में पहले समीर और फिर छगन भुजबल को गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों को फिलहाल मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया है।